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22 करोड़ की परियोजना के बाद फिर मंडराया खतरा!

क्या इस मानसून में फिर डूबेगा पलिया?**

  1. शारदा नदी में दोबारा जमा हुई भारी सिल्ट, सैकड़ों गांवों पर बाढ़ का खतरा गहरायाएक तरफ सरकार करोड़ों रुपए खर्च कर शारदा नदी को चैनलाइज करने का दावा करती रही, दूसरी तरफ आज वही नदी फिर से लखीमपुर खीरी के पलिया और निघासन इलाके के लोगों के लिए डर का कारण बनती जा रही है। शारदा नदी के पुल के नीचे दोबारा भारी मात्रा में सिल्ट जमा होने से इलाके में दहशत का माहौल है। लोगों को डर है कि अगर समय रहते सफाई नहीं हुई तो आगामी मानसून में पलिया शहर समेत सैकड़ों गांव फिर से बाढ़ की त्रासदी झेलने को मजबूर हो सकते हैं।
    22.23 करोड़ की परियोजना पर फिर उठे सवाल
    लखीमपुर खीरी के पलिया तहसील क्षेत्र में शारदा नदी हर साल तबाही का कारण बनती रही है। बाढ़ और कटान से राहत दिलाने के लिए मुख्यमंत्री Yogi Adityanath सरकार ने पिछले वर्ष करीब 22 करोड़ 23 लाख रुपए की लागत से शारदा नदी चैनलाइजेशन और ड्रेजिंग परियोजना शुरू करवाई थी।
    परियोजना के तहत नदी की डिसिल्टिंग, ड्रेजिंग और लगभग 7 किलोमीटर क्षेत्र में चैनलाइजेशन का कार्य कराया गया था। दावा किया गया था कि इससे पलिया कस्बे सहित आसपास के करीब 29 गांवों को बाढ़ और कटान से राहत मिलेगी।
    लेकिन अब मानसून से पहले एक बार फिर नदी के नीचे भारी मात्रा में सिल्ट जमा होने से पूरे प्रोजेक्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद कार्य में गंभीर लापरवाही बरती गई, जिसके चलते कुछ ही समय में नदी फिर पुरानी स्थिति में पहुंच गई।
    फिर मंडराने लगा बाढ़ का खतरा
    इलाके के जानकारों और ग्रामीणों का कहना है कि शारदा नदी के पुल और आसपास के हिस्सों में बड़ी मात्रा में सिल्ट जमा हो चुकी है। नदी की जलधारण क्षमता कम होने से मानसून के दौरान पानी का दबाव तेजी से बढ़ सकता है।
    अगर समय रहते सिल्ट नहीं हटाई गई तो पलिया, निघासन और आसपास के सैकड़ों गांवों में भारी तबाही की आशंका है।
    पिछले वर्षों में आई बाढ़ ने हजारों किसानों की फसलें बर्बाद कर दी थीं। कई गांवों में घर बह गए थे और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पलायन करना पड़ा था। करोड़ों रुपए की आर्थिक क्षति के साथ-साथ लोगों को भावनात्मक त्रासदी भी झेलनी पड़ी थी।
    जब बहन के शव को कंधे पर लेकर 15 किलोमीटर चला भाई
    शारदा नदी की बाढ़ का दर्द आज भी इलाके के लोगों के जेहन में जिंदा है।
    बाढ़ के दौरान एक ऐसा मार्मिक दृश्य सामने आया था जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। इलाके में पानी भर जाने और अंतिम संस्कार के लिए जगह न मिलने के कारण एक भाई अपनी बहन के शव को कंधे पर लेकर करीब 15 किलोमीटर तक पैदल चलने को मजबूर हुआ था।
    उस घटना ने यह दिखा दिया था कि बाढ़ केवल आर्थिक नुकसान नहीं करती, बल्कि इंसानी जिंदगी को भी गहरे जख्म दे जाती है।
    विशेषज्ञों ने पहले ही दी थी चेतावनी
    जल संस्थान एवं ऊर्जा रिसर्च पुणे के वैज्ञानिक डॉ. रघुनाथ ने जनवरी 2025 में अपनी एक संक्षिप्त रिपोर्ट में स्पष्ट कहा था कि केवल ड्रेजिंग और चैनलाइजेशन से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा।
    उनके अनुसार, जब तक बनबसा बैराज से लेकर लखीमपुर खीरी तक शारदा नदी में गिरने वाली नेपाली नदियों और नालों को परियोजना में शामिल नहीं किया जाएगा, तब तक बाढ़ की समस्या बनी रहेगी।
    डॉ. रघुनाथ का कहना था कि नेपाल से आने वाले अतिरिक्त पानी और सिल्ट का वैज्ञानिक अध्ययन किए बिना किसी भी परियोजना का असर सीमित ही रहेगा।
    हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि उत्तर प्रदेश सरकार के बाढ़ बचाव परियोजनाओं से जुड़े अधिकारियों ने उनके सुझावों को गंभीरता से नहीं लिया।
    नेपाल से आने वाला पानी बढ़ा रहा खतरा
    नदियों पर लंबे समय से कार्य कर रहे समाजसेवी राजेश भारती का कहना है कि शारदा नदी पिछले कई दशकों से लखीमपुर खीरी, पीलीभीत और सीतापुर जिलों में तबाही का बड़ा कारण बनी हुई है।
    उनके अनुसार, बनबसा बैराज से निकलने के बाद लखीमपुर पहुंचने तक करीब 8 नेपाली नदियां और दर्जनों छोटे नेपाली नाले शारदा नदी में आकर मिलते हैं। इससे नदी में क्षमता से कहीं अधिक पानी पहुंचता है।
    समाज सेवी राजेश भारतीय का आरोप है कि अब तक किसी भी सरकार ने इन नेपाली नदियों के प्रभाव का गंभीर अध्ययन नहीं कराया।
    उन्होंने कहा कि नेपाल लगातार सीमा क्षेत्र के दलदली इलाकों को उपजाऊ बनाने के लिए विभिन्न परियोजनाएं चला रहा है, लेकिन भारतीय अधिकारियों ने कभी इन परियोजनाओं का समुचित आकलन नहीं किया। परिणामस्वरूप हर वर्ष सीमा से लगे भारतीय क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ता जा रहा है।
    विधायक रोमी साहनी ने क्या कहा?
    पलिया विधानसभा से विधायक रोमी साहनी का कहना है कि सरकार लगातार बाढ़ से बचाव के लिए काम कर रही है।
    उनके अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बनाई गई 22 करोड़ 23 लाख रुपए की परियोजना काफी हद तक सफल रही थी और इससे लोगों को राहत भी मिली थी।
    उन्होंने माना कि वर्तमान में शारदा नदी के नीचे दोबारा सिल्ट जमा हुई है, लेकिन प्रशासन जल्द ही इसकी सफाई कराएगा। विधायक ने कहा कि इलाके को बाढ़ से बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
    मानसून अब ज्यादा दूर नहीं है। मौसम विभाग पहले ही इस वर्ष सामान्य से अधिक बारिश की संभावना जता चुका है। ऐसे में शारदा नदी में जमा सिल्ट प्रशासन और सरकार दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है।
    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द व्यापक स्तर पर डिसिल्टिंग और वैज्ञानिक अध्ययन नहीं कराया गया तो आगामी मानसून पलिया और निघासन क्षेत्र में फिर भारी तबाही ला सकता है।
    लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है —
    क्या 22 करोड़ की परियोजना सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई?
    और अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो क्या इस बार फिर शारदा नदी हजारों परिवारों की जिंदगी बहा ले जाएगी?

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