उत्तर प्रदेशएक्सक्लूसिव खबरें

90% बजट खर्च, फिर भी अधूरे बाढ़ प्रोजेक्ट! मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के सामने फेल हुए इंजीनियर, 6 अफसरों पर कार्रवाई

जलशक्ति मंत्री की समीक्षा बैठक में खुली सिंचाई विभाग की लापरवाही, अधूरे बाढ़ सुरक्षा कार्यों पर सख्त कार्रवाई के आदेश।

90 प्रतिशत बजट खर्च… लेकिन बाढ़ परियोजनाओं का हिसाब नहीं! जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के सामने इंजीनियर जवाब नहीं दे पाए। समीक्षा बैठक में मचा हड़कंप और छह अभियंताओं पर कारण बताओ नोटिस के आदेश। आखिर करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी काम अधूरा क्यों है? देखिए पूरी रिपोर्ट।

उत्तर प्रदेश में बाढ़ सुरक्षा और सिंचाई परियोजनाओं को लेकर जलशक्ति विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। विभागीय समीक्षा बैठक में उस समय अधिकारियों की लापरवाही उजागर हो गई, जब करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद कई अभियंता बाढ़ सुरक्षा परियोजनाओं की वास्तविक प्रगति और कार्यों का संतोषजनक विवरण मंत्री के सामने प्रस्तुत नहीं कर सके।
प्रदेश के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने विभागीय समीक्षा के दौरान अधिकारियों की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार जनता की सुरक्षा और विकास कार्यों के लिए  भरपूर बजट उपलब्ध करा रही है, लेकिन यदि अधिकारी समय पर और गुणवत्तापूर्ण कार्य नहीं कर पाए तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

बजट खर्च, लेकिन काम अधूरा

समीक्षा बैठक में सामने आया कि कई बाढ़ सुरक्षा परियोजनाओं में लगभग 90 प्रतिशत तक बजट खर्च किया जा चुका है, लेकिन धरातल पर कार्य अपेक्षित गति से पूरे नहीं हुए। कई अभियंता परियोजनाओं की प्रगति, निर्माण की स्थिति और शेष कार्यों का स्पष्ट ब्योरा तक नहीं दे सके।
इस पर मंत्री ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि केवल कागजों पर प्रगति दिखाना स्वीकार नहीं किया जाएगा। जनता को वास्तविक लाभ मिलना चाहिए।
छह अभियंताओं को कारण बताओ नोटिस
बैठक में लापरवाही सामने आने के बाद छह अभियंताओं को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी करने के निर्देश दिए गए। उनसे पूछा जाएगा कि परियोजनाओं में देरी क्यों हुई और बजट खर्च होने के बावजूद कार्य समय पर पूरा क्यों नहीं हो सका।
मंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो निलंबन सहित विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

मंत्री बोले— गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं

स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में समय रहते सभी सुरक्षा कार्य पूरे हों ताकि लोगों की जान-माल की रक्षा की जा सके। ऐसे में किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने कहा कि सभी परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग होगी और जिम्मेदार अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाएगी।

धीमी परियोजनाओं पर विशेष निगरानी

समीक्षा बैठक में विशेष रूप से उन परियोजनाओं की समीक्षा की गई जिनकी प्रगति काफी धीमी पाई गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि प्रत्येक परियोजना की दैनिक मॉनिटरिंग करें और निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्य पूर्ण कराएं।
मंत्री ने यह भी कहा कि जिन स्थानों पर बाढ़ सुरक्षा तटबंध, कटान रोकने के कार्य और अन्य सिंचाई परियोजनाएं चल रही हैं, वहां गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

जिलों से मांगी जाएगी नियमित रिपोर्ट

बैठक में निर्देश दिए गए कि सभी संबंधित जिलों से परियोजनाओं की नियमित प्रगति रिपोर्ट ली जाए। जिन अधिकारियों की वजह से कार्य प्रभावित होगा, उनके खिलाफ जिम्मेदारी तय की जाएगी।

जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

उत्तर प्रदेश के कई जिले हर वर्ष बाढ़ की चपेट में आते हैं। ऐसे में तटबंधों की मरम्मत, कटान निरोधक कार्य, नदी प्रशिक्षण, पंपिंग स्टेशन और सिंचाई परियोजनाओं का समय पर पूरा होना बेहद आवश्यक माना जाता है। सरकार का उद्देश्य है कि मानसून के दौरान लोगों को कम से कम नुकसान उठाना पड़े।
मंत्री का स्पष्ट संदेश
समीक्षा बैठक के अंत में जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने दो टूक कहा—
“सरकार बजट देने में कोई कमी नहीं कर रही है। यदि बजट खर्च होने के बाद भी काम समय पर पूरा नहीं होगा या गुणवत्ता में कमी मिलेगी, तो संबंधित अधिकारी और अभियंता सीधे जिम्मेदार होंगे। लापरवाही करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।”

अब विभागीय कार्रवाई और अभियंताओं के जवाब पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

यदि संतोषजनक उत्तर नहीं मिला तो आने वाले दिनों में सिंचाई विभाग में बड़े प्रशासनिक कदम उठाए जा सकते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Home
Mobile App
Search
YouTube
Facebook
error: © Ground Zero Report Digital Content is protected. Copying is not allowed.