मुखिया की मौत के बाद टूटा परिवार, मदद को पहुंचे सपा नेता नरेश यादव, राशन और घरेलू सामान देकर बढ़ाया सहारा
पलिया विधानसभा के लोचनपुर गांव में पीड़ित परिवार से मिले नरेश यादव, हरसंभव सहयोग का दिया भरोसा, क्षेत्र में सामाजिक कार्यों की हो रही चर्चा।

जब परिवार का सहारा छिन गया और घर में आर्थिक संकट गहरा गया, तब मदद का हाथ लेकर पहुंचे सपा नेता नरेश यादव। क्या ऐसे जनसेवक ही जनता का असली भरोसा बन रहे हैं?

लखीमपुर खीरी। पलिया विधानसभा क्षेत्र के ग्राम लोचनपुर में एक जरूरतमंद परिवार की मदद के लिए समाजवादी पार्टी के नेता नरेश यादव आगे आए। गांव निवासी बेचेलाल के निधन के बाद उनके परिवार पर आर्थिक संकट गहरा गया था। परिवार के सामने रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी मुश्किल हो गया था। इसकी जानकारी मिलने पर सपा नेता नरेश यादव स्वयं पीड़ित परिवार के घर पहुंचे और उनकी पत्नी फूल कुमारी को राशन सहित आवश्यक घरेलू सामान उपलब्ध कराया।
नरेश यादव ने परिवार के दुख को साझा करते हुए भरोसा दिलाया कि भविष्य में भी यदि किसी प्रकार की जरूरत पड़ेगी तो वह हरसंभव सहयोग के लिए हमेशा तैयार रहेंगे। उन्होंने कहा कि समाज के कमजोर और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना हर व्यक्ति का नैतिक दायित्व है और ऐसे कठिन समय में किसी परिवार को अकेला नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
ग्रामीणों ने बताया कि बेचेलाल के निधन के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर हो गई थी। ऐसे समय में नरेश यादव का गांव पहुंचकर मदद करना परिवार के लिए बड़ी राहत साबित हुआ। राशन और घरेलू उपयोग का सामान मिलने से परिवार को तत्काल राहत मिली।
क्षेत्र में नरेश यादव लगातार सामाजिक कार्यों को लेकर सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। पलिया विधानसभा और आसपास के गांवों में वे समय-समय पर जरूरतमंद, गरीब और पीड़ित परिवारों तक पहुंचकर सहायता करते रहे हैं। चाहे किसी बीमार व्यक्ति की मदद हो, आर्थिक संकट से जूझ रहे परिवार का सहयोग हो या अन्य सामाजिक कार्य, स्थानीय लोगों का कहना है कि नरेश यादव अक्सर ऐसे मामलों में आगे बढ़कर योगदान देते हैं।
लोचनपुर में भी उनके इस सहयोग की ग्रामीणों ने सराहना की। कई लोगों ने कहा कि दुख की घड़ी में किसी परिवार का साथ देना सबसे बड़ी मानव सेवा है। ग्रामीणों के अनुसार, नरेश यादव का लोगों के बीच लगातार पहुंचना और जरूरत के समय सहयोग करना उन्हें क्षेत्र में एक सक्रिय जनप्रतिनिधि के रूप में पहचान दिला रहा है।
हालांकि यह एक सामाजिक सहायता का कार्यक्रम था, लेकिन इस पहल की चर्चा पूरे इलाके में हो रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि जरूरतमंद परिवारों तक सीधे पहुंचकर सहायता करना समाज में सकारात्मक संदेश देता है और ऐसे प्रयासों से लोगों का मनोबल भी बढ़ता है।



