लखीमपुर खीरी
Trending

लखीमपुर खीरी के दुधवा में दो साल में लगातार बाघों की मौतें: क्या जंगल का सबसे बड़ा शिकारी भी अब सुरक्षित नहीं?

दो वर्षों में लखीमपुर खीरी में कम-से-कम छह बाघ और बाघिन की मौत के मामले सामने आए। कहीं ट्रेन की चपेट, कहीं आपसी संघर्ष, कहीं ट्रेंकुलाइजेशन के बाद मौत तो कहीं रहस्यमय परिस्थितियों में मिला शव।

लखीमपुर खीरी में दुधवा टाइगर रिजर्व देश की शान है, लेकिन यदि लगातार बाघ मर रहे हैं तो सवाल उठना स्वाभाविक है—क्या यह केवल संयोग है या संरक्षण व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है?
लखीमपुर खीरी का दुधवा टाइगर रिजर्व देश के सबसे महत्वपूर्ण बाघ आवासों में गिना जाता है। यहां बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए वर्षों से करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके बावजूद पिछले लगभग दो वर्षों में सामने आई बाघ और बाघिन की मौतों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली, निगरानी व्यवस्था और संरक्षण उपायों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ताजा मामला दक्षिणी खीरी वन प्रभाग के महेशपुर क्षेत्र का है। 29 जून को एक घायल नर बाघ मिला, जिसने एक ग्रामीण पर हमला भी किया था। उपचार के प्रयासों के बावजूद उसकी मौत हो गई। डीएफओ तापस मिहिर के अनुसार शव को भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), बरेली भेजा गया है, जहां पोस्टमार्टम के बाद मौत का वास्तविक कारण स्पष्ट होगा।
इससे ठीक पहले 23 जून को मझगई रेंज में दो लोगों पर हमले के बाद पकड़ी गई एक बाघिन ट्रेंकुलाइजेशन के लगभग 12 घंटे बाद मर गई। प्रारंभिक जांच में रक्तस्रावी गैस्ट्राइटिस, भारी परजीवी संक्रमण तथा गर्मी और कैप्चर स्ट्रेस जैसे कारण सामने आए हैं, जबकि अंतिम रिपोर्ट अभी प्रतीक्षित है। इस मामले की जांच के लिए राज्य सरकार ने एसआईटी गठित की है और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने भी रिपोर्ट तलब की है।
इसी वर्ष 6 मई के आसपास दुधवा बफर की मझगई रेंज में एक बाघिन का शव मिला। पोस्टमार्टम में दूसरे नर बाघ से संघर्ष को मौत का कारण माना गया। वहीं 1 अप्रैल को मैलानी रेंज में एक बाघिन ट्रेन की चपेट में आकर मारी गई।
मार्च 2026 में दक्षिण खीरी वन प्रभाग के इमलिया क्षेत्र में भी एक वयस्क नर बाघ मृत मिला था। उस समय वन विभाग ने शिकार की आशंका से इनकार करते हुए संक्रमण सहित विभिन्न संभावित कारणों की जांच के लिए नमूने सुरक्षित किए थे।
इससे पहले फरवरी 2025 में दुधवा बफर क्षेत्र के फूलवरिया गांव में मानव–वन्यजीव संघर्ष के दौरान ग्रामीणों की भीड़ ने एक बाघिन को पीट-पीटकर मार डाला था। उस घटना ने भी संरक्षण व्यवस्था और संघर्ष प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए थे।
इन घटनाओं को जोड़कर देखें तो पिछले लगभग दो वर्षों में लखीमपुर खीरी में कम-से-कम छह बाघ और बाघिन की मौत के मामले सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं। इन मौतों के कारण अलग-अलग रहे हैं—मानव–वन्यजीव संघर्ष, ट्रेन दुर्घटना, बाघों के बीच संघर्ष, ट्रेंकुलाइजेशन के बाद मौत तथा अन्य जांचाधीन या चिकित्सकीय कारण।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर बाघ बार-बार जंगल से बाहर क्यों आ रहे हैं? वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं—क्षेत्रीय संघर्ष, भोजन की तलाश, बढ़ता मानव हस्तक्षेप, आवास पर दबाव, बीमारी, उम्र या चोट। हर मामले का कारण वैज्ञानिक जांच से ही तय किया जा सकता है।
दुधवा का इतिहास यह भी बताता है कि अतीत में वन्यजीव तस्करी के मामलों का खुलासा हो चुका है। इसलिए हर संदिग्ध मौत में यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि पोस्टमार्टम, फॉरेंसिक, विष विज्ञान (टॉक्सिकोलॉजी) और अन्य वैज्ञानिक जांच पूरी पारदर्शिता से हो। फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं है कि हाल की इन मौतों के पीछे कोई सक्रिय शिकार गिरोह जिम्मेदार है, इसलिए इस संभावना को तथ्य नहीं बल्कि जांच का विषय माना जाना चाहिए।
दुधवा केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, पूरे देश की प्राकृतिक धरोहर है। ऐसे में हर बाघ की मौत केवल एक वन्यजीव की मृत्यु नहीं, बल्कि संरक्षण व्यवस्था की परीक्षा भी है। महेशपुर और मझगई की हालिया घटनाओं के बाद उम्मीद की जा रही है कि जांच रिपोर्टें शीघ्र सार्वजनिक होंगी और यदि कहीं कोई कमी पाई जाती है तो उसे दूर करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। बाघों की सुरक्षा, वैज्ञानिक निगरानी और मानव–वन्यजीव संघर्ष को कम करना आने वाले समय की सबसे बड़ी चुनौती होगी।

Please follow and like us:
Pin Share

Manoj Kumar Sharma

मनोज कुमार शर्मा ग्राउंड जीरो रिपोर्ट डिजिटल के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वह लंबे समय से पत्रकारिता से जुड़े हैं और लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश, अपराध, राजनीति, प्रशासन और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की निष्पक्ष एवं तथ्यपरक रिपोर्टिंग करते हैं। ग्राउंड जीरो रिपोर्ट डिजिटल का उद्देश्य पाठकों तक विश्वसनीय और सटीक समाचार पहुंचाना है।

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!