कभी कीचड़ में डूबता था यह बाजार… आज पूरे यूपी के लिए बना मिसाल, आखिर कैसे बदली सरसवां की तकदीर?
लखीमपुर खीरी के धौरहरा ब्लॉक का सरसवां हाट बाजार बना महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास का मॉडल, 160 दुकानों से चमकी सैकड़ों परिवारों की जिंदगी

लखीमपुर खीरी जिले के धौरहरा विकास खंड का सरसवां गांव आज पूरे उत्तर प्रदेश में ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल बनकर उभर रहा है। कभी कीचड़, गड्ढों और जलभराव से जूझने वाला यह हाट बाजार अब आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होकर किसानों, महिलाओं और छोटे व्यापारियों की आजीविका का मजबूत केंद्र बन चुका है। मनरेगा के तहत विकसित यह ग्रामीण हाट बाजार, जिसे अब लोग “जय राम जी बाजार” के नाम से भी जानने लगे हैं, तराई क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदल रहा है।
– जहां कभी कीचड़ था, वहां आज विकास की रौनक
एक समय था जब यह बाजार बारिश में पानी से भर जाता था। दुकानदारों को कीचड़ में दुकानें लगानी पड़ती थीं और ग्राहकों को आने-जाने में दिक्कत होती थी। लेकिन आज वही बाजार पक्के चबूतरों, सोलर लाइट, पेयजल, शौचालय, सीसीटीवी कैमरों और व्यवस्थित दुकानों से सुसज्जित है।
करीब 160 दुकानें यहां नियमित रूप से लगती हैं। जमीन पर दुकान लगाने के लिए 10 रुपये और चबूतरे पर दुकान लगाने के लिए 20 रुपये शुल्क लिया जाता है। इसकी जिम्मेदारी भी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं संभालती हैं।
– महिलाओं ने संभाली बाजार की कमान
इस बाजार की सबसे बड़ी ताकत यहां काम कर रहीं स्वयं सहायता समूह की महिलाएं हैं। पांच समूहों से जुड़ी महिलाएं अपने हाथों से बनाए उत्पाद बेच रही हैं और परिवार की आर्थिक रीढ़ बन रही हैं।
समूह सखी अमरिशा देवी बताती हैं कि उन्होंने घर पर कोल्हू लगाकर सरसों और लाही का शुद्ध तेल निकालना शुरू किया। पहले बाजार जलभराव में डूबा रहता था, लेकिन बाजार विकसित होने के बाद धौरहरा ब्लॉक के बीडीओ ने महिलाओं के लिए विशेष चबूतरे बनवाए और उन्हें व्यापार के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा, “पहले महिलाएं घर से बाहर नहीं निकलती थीं, लेकिन अब यह बाजार उन्हें पहचान और आत्मनिर्भरता दे रहा है।”
– अयोध्या तक पहुंची सरसवां की पहचान
समूह सखी संजू देवी गोबर से दीपक बनाती हैं। उनके बनाए 25 हजार दीपक अयोध्या दीपोत्सव में भेजे जा चुके हैं। अब वह मसाले तैयार कर बाजार में बेच रही हैं।
वहीं गायत्री चावल बेचती हैं। उनका कहना है कि पहले केवल पति की कमाई से घर चलाना मुश्किल था, लेकिन अब वह खुद भी आय अर्जित कर रही हैं, जिससे परिवार की स्थिति मजबूत हुई है।
आरती नमकीन और सेमी बनाकर बाजार में बेचती हैं। इससे उनकी आमदनी बढ़ी है और घरेलू जरूरतें आसानी से पूरी हो रही हैं।
– महिलाओं के लिए विशेष सुविधाएं बनी ताकत
इस हाट बाजार में महिलाओं के लिए अलग शौचालय, बैठने की व्यवस्था और सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। बाजार के संचालन के लिए कार्यालय बनाया गया है जिसकी जिम्मेदारी आरती के पास है। इससे बाजार का संचालन व्यवस्थित तरीके से हो रहा है।
– ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सफल मॉडल बना सरसवां
सरसवां हाट बाजार अब केवल खरीद-बिक्री का केंद्र नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण की जीवंत प्रयोगशाला बन चुका है। यह मॉडल दिखा रहा है कि यदि गांवों में स्थानीय बाजार विकसित किए जाएं तो रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
– लखीमपुर खीरी के डीएम अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि यह बाजार महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास का वास्तविक उदाहरण है। उन्होंने अपील की कि जनपद की हर ग्राम सभा में इस तरह के बाजार विकसित किए जाएं ताकि ग्रामीण रोजगार बढ़े और महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकें।
सरसवां हाट बाजार में आने वाले दुकानदारों और ग्राहकों के लिए सेल्फी प्वाइंट बनाया गया है।
सरसवां का यह हाट बाजार अब सिर्फ एक बाजार नहीं, बल्कि तराई क्षेत्र में बदलाव, आत्मनिर्भरता और नई उम्मीद की पहचान बन चुका है।





