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सीमावर्ती जिले में नियमों की अनदेखी? लखीमपुर खीरी के 28 थानों में 12 की कमान उपनिरीक्षकों के हाथ, इंस्पेक्टर पुलिस लाइन में!

नेपाल सीमा से जुड़े संवेदनशील जिले लखीमपुर खीरी में तैनाती व्यवस्था पर उठ रहे सवाल। 28 थानों में 12 थाने उपनिरीक्षक (SI) स्तर के अधिकारियों द्वारा संचालित, जबकि पुलिस लाइन में बड़ी संख्या में निरीक्षक (Inspector) उपलब्ध होने की चर्चा।

भारत-नेपाल सीमा से जुड़े लखीमपुर खीरी जिले में अपराध, तस्करी और नशे के बढ़ते मामलों के बीच एक बड़ा सवाल उठ रहा है—जब पुलिस लाइन में निरीक्षक स्तर के अधिकारी मौजूद हैं, तो आखिर संवेदनशील और बॉर्डर थानों की कमान अब भी उपनिरीक्षकों के हाथों में क्यों है?

लखीमपुर खीरी की पुलिस व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
उत्तर प्रदेश का लखीमपुर खीरी जिला भारत-नेपाल सीमा से जुड़ा सबसे संवेदनशील जिलों में गिना जाता है। जिले में मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध खनन, वन अपराध, पशु तस्करी और महिला अपराध जैसी चुनौतियां लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे में थाना प्रभारियों की तैनाती को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
पुलिस विभाग की उपलब्ध तैनाती सूची के अनुसार जिले में कुल 28 थाने संचालित हैं। इनमें से 16 थानों की कमान निरीक्षक (Inspector) स्तर के अधिकारियों के पास है, जबकि 12 थानों का संचालन उपनिरीक्षक (Sub Inspector) स्तर के अधिकारी कर रहे हैं।
किन थानों की कमान उपनिरीक्षकों के हाथ में?
उपलब्ध सूची के अनुसार निम्न थानों में उपनिरीक्षक स्तर के अधिकारी तैनात हैं—
खीरी
महिला थाना
ईसानगर
खमरिया
पड़ुआ
पलिया
सम्पूर्णानगर
चन्दन चौकी
मझगई
भीरा
हैदराबाद
नीमगांव
यानी जिले के लगभग 43 प्रतिशत थाने उपनिरीक्षक स्तर के अधिकारियों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं।
16 थानों में निरीक्षक स्तर की तैनाती
जिले के जिन थानों में निरीक्षक स्तर के अधिकारी तैनात हैं उनमें प्रमुख रूप से—
कोतवाली सदर, फरधान, शारदानगर, धौरहरा, फूलबेहड़, निघासन, सिंगाही, तिकुनियां, गौरीफंटा, गोला, मैलानी, पसगवां, मोहम्मदी, उचौलिया, मितौली और मैगलगंज शामिल हैं।
नेपाल सीमा के थानों पर क्या कहते हैं नियम?
गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय की ओर से समय-समय पर जारी निर्देशों में नेपाल सीमा से जुड़े थानों को विशेष संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है।
सार्वजनिक रूप से उपलब्ध निर्देशों के अनुसार—
सीमा से जुड़े थानों की कमान निरीक्षक स्तर के अधिकारी को दी जानी चाहिए।
तस्करी और स्थानीय गठजोड़ को रोकने के लिए अधिकतम छह माह का कार्यकाल निर्धारित किया गया है।
सीमा चौकियों पर आधुनिक निगरानी उपकरणों की व्यवस्था अनिवार्य मानी गई है।
इसी संदर्भ में सवाल उठ रहे हैं कि पलिया, सम्पूर्णानगर और चन्दन चौकी जैसे संवेदनशील सीमा क्षेत्र के थानों में अभी भी उपनिरीक्षक स्तर के अधिकारी तैनात हैं।
पलिया क्षेत्र में नशे का बढ़ता जाल
नेपाल सीमा से सटे पलिया क्षेत्र में स्मैक और अन्य मादक पदार्थों की तस्करी लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नशे का कारोबार नई पीढ़ी को तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रहा है।
क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि पुलिस समय-समय पर कैरियर या छोटे स्तर के आरोपियों पर कार्रवाई करती है, लेकिन नशे के बड़े नेटवर्क तक पहुंचने में अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही है।
हालांकि पुलिस विभाग समय-समय पर तस्करी विरोधी अभियान चलाने और बरामदगी के आंकड़े प्रस्तुत करने का दावा करता रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर नशे की उपलब्धता को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं।
पुलिस लाइन में इंस्पेक्टर, फिर थानों में SI क्यों?
सूत्रों के अनुसार पुलिस लाइन में लगभग 27 निरीक्षक स्तर के अधिकारी मौजूद होने की चर्चा है। यदि यह स्थिति सही है तो सवाल यह उठता है कि संवेदनशील और सीमा से जुड़े थानों में निरीक्षक स्तर की तैनाती क्यों नहीं की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि—
अनुभवी निरीक्षक अपराध नियंत्रण में अधिक प्रभावी साबित हो सकते हैं।
सीमा क्षेत्रों में खुफिया नेटवर्क मजबूत करने में वरिष्ठ अधिकारियों का अनुभव उपयोगी होता है।
नशा, तस्करी और संगठित अपराध से निपटने में नेतृत्व क्षमता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
महिला अपराध भी बना चुनौती
जिले में महिला अपराध के मामलों को लेकर भी चिंता व्यक्त की जा रही है। महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों में प्रभावी जांच, त्वरित कार्रवाई और बेहतर पर्यवेक्षण की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है।
ऐसे में थाना स्तर पर अनुभवी नेतृत्व की मांग और मजबूत होती दिखाई दे रही है।
बड़ा सवाल
जब लखीमपुर खीरी जैसा संवेदनशील सीमा जिला नेपाल बॉर्डर से जुड़ा है, तब क्या सभी सीमा और संवेदनशील थानों पर निरीक्षक स्तर के अधिकारियों की तैनाती सुनिश्चित की जानी चाहिए? क्या छह माह की टेन्योर नीति का पालन हो रहा है? और क्या बढ़ते अपराध तथा नशे की चुनौती से निपटने के लिए तैनाती व्यवस्था की समीक्षा जरूरी है?

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