लखीमपुर खीरी:सिसैया खुर्द में पुलिस पर पिटाई के आरोप, ग्रामीणों ने SSP से लगाई न्याय की गुहार
‘काम नहीं तो वोट नहीं’ प्रदर्शन के दो दिन बाद बढ़ा विवाद, घरों में घुसकर महिलाओं और बच्चों से मारपीट का ग्रामीणों का आरोप


लखीमपुर खीरी के धौरहरा इलाके के सिसैया खुर्द गांव में विकास के मुद्दे से शुरू हुआ विवाद अब पुलिस कार्रवाई के आरोपों तक पहुंच गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रदर्शन के दो दिन बाद रात में पुलिसकर्मी उनके घरों में पहुंचे और महिलाओं, बच्चों व पुरुषों के साथ मारपीट की। मामले में ग्रामीणों ने अधिकारियों से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
सिसैया खुर्द गांव में बीते दिनों ग्रामीणों ने गांव की खराब सड़क, जलभराव और अन्य विकास कार्यों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने ‘काम नहीं तो वोट नहीं’ के नारे लगाए थे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि लंबे समय से गांव में बुनियादी सुविधाओं की समस्या बनी हुई है।
इसी प्रदर्शन के करीब दो दिन बाद 14 सितंबर की रात करीब 8 बजे पुलिस कार्रवाई को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया।
ग्रामीणों की ओर से धौरहरा क्षेत्राधिकारी को दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि करीब आठ पुलिसकर्मी उनके घर में दाखिल हुए और परिवार के लोगों के साथ मारपीट की। शिकायत में महिलाओं और बच्चों के साथ कथित अभद्रता और मारपीट के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पुलिस कुछ लोगों को अपने साथ थाने भी ले गई। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत में प्रधान और अन्य लोगों का भी जिक्र
ग्रामीणों की लिखित शिकायत में ग्राम प्रधान भग्गू खां के कहने पर कार्रवाई किए जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायत में फुरकान पुत्र कल्लू और मन्ना पुत्र गफ्फार के नाम का भी उल्लेख है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
पुलिस का क्या कहना है?
मामले में पुलिस की ओर से कहा गया है कि पुलिस को मारपीट की सूचना मिली थी। क्षेत्राधिकारी धौरहरा शमशेर बहादुर सिंह के अनुसार मामले की जांच की जा रही है। पुलिस ने ग्रामीणों द्वारा लगाए गए मारपीट के आरोपों की जानकारी होने से इनकार नहीं किया, बल्कि जांच के बाद उचित कार्रवाई की बात कही है।
विधायक को लेकर भी सामने आया आरोप
इस पूरे विवाद को गांव में हुए राजनीतिक विरोध प्रदर्शन से भी जोड़कर देखा जा रहा है। ग्रामीणों के प्रदर्शन में स्थानीय विधायक और ग्राम प्रधान के खिलाफ नारे लगाए जाने की बात सामने आई थी।
इसके बाद कुछ ग्रामीणों की ओर से पुलिस कार्रवाई को राजनीतिक दबाव से जोड़ते हुए आरोप लगाए गए। हालांकि विधायक की ओर से इन आरोपों को गलत बताया गया है। भाजपा से जुड़े पदाधिकारियों ने भी मामले में राजनीतिकरण किए जाने की बात कही है।
ऐसे में अब पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि 14 सितंबर की रात गांव में वास्तव में क्या हुआ? पुलिस किस सूचना पर पहुंची थी? घरों में प्रवेश और मारपीट के आरोपों में कितनी सच्चाई है? और क्या इस कार्रवाई का गांव में हुए विरोध प्रदर्शन से कोई संबंध था?
इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
अब निगाह जांच पर
सिसैया खुर्द का मामला अब सिर्फ विकास कार्यों को लेकर ग्रामीणों के विरोध तक सीमित नहीं रहा है। पुलिस पर लगे गंभीर आरोपों के बाद प्रशासनिक जांच की मांग तेज हो गई है।
ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, जबकि पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। अब जांच रिपोर्ट ही तय करेगी कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।



