लखीमपुर खीरी में NH-730 पर ‘12 फीट का गड्ढा’ और अब जांच के आदेश! पहले उठे थे सवाल… फिर भी क्यों नहीं चेते अफसर?
गोला के रेलवे ओवरब्रिज पर सड़क धंसने से मचा हड़कंप, रातों-रात मिट्टी डालकर भरा गया गड्ढा; दिशा बैठक में उठे गुणवत्ता के सवालों के बाद अब डीएम अंजनी कुमार सिंह ने जांच के दिए निर्देश


उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी। गोला गोकर्णनाथ में 75 करोड़ की लागत से बने NH-730 के रेलवे ओवरब्रिज पर सड़क के बीचों-बीच अचानक बने गहरे गड्ढे ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार बारिश के बीच देर रात सड़क धंसने से बने इस गड्ढे की गहराई स्थानीय स्तर पर करीब 10 से 12 फीट बताई गई। गड्ढा सड़क के बीचों-बीच होने के कारण रात में गुजरने वाले वाहनों के लिए बड़ा खतरा पैदा हो गया था।
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि देर रात वहां से गुजर रहे एक राहगीर ने अपनी शर्ट उतारकर खतरे के निशान के तौर पर सड़क पर लगा दी, ताकि अंधेरे में आने वाले वाहन चालक सतर्क हो सकें।
सूचना मिलने के बाद सड़क निर्माण से जुड़े कर्मचारी और ठेकेदार मौके पर पहुंचे। इसके बाद जेसीबी की मदद से गड्ढे में मिट्टी डालकर उसे पाटने का काम किया गया। घटनास्थल के वीडियो और तस्वीरों में सड़क पर खुदाई और मरम्मत का काम दिखाई दे रहा है।
बारिश को बताया वजह, लापरवाही से इनकार
मौके पर पहुंचे PWD के JE राहुल सिंह ने गड्ढे के पीछे पिछले दो-तीन दिनों से हो रही बारिश और पानी इकट्ठा होने को वजह बताया। उनका कहना है कि इसमें किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती गई।
हालांकि, सड़क के बीचों-बीच गहरा गड्ढा बनने और उसके बाद रात में तत्काल मिट्टी डालकर उसे पाटने की कार्रवाई ने निर्माण की गुणवत्ता और जलनिकासी व्यवस्था को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
पहले भी बैठक में उठ चुका था मुद्दा
खास बात यह है कि गोला के रेलवे ओवरब्रिज और NH-730 के निर्माण की गुणवत्ता को लेकर पहले भी जनप्रतिनिधियों की ओर से सवाल उठाए जा चुके हैं। जून 2026 की दिशा बैठक में गोला नगर पालिका अध्यक्ष विजय शुक्ला ‘रिंकू’ सहित जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में ओवरब्रिज की खामियों और NH के कार्यों का मुद्दा उठने की रिपोर्ट सामने आई थी। बैठक में सांसद आनंद सिंह भदौरिया ने भी गोला के निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज की खामियों को लेकर नाराजगी जताई थी।
इससे पहले अप्रैल 2026 में भी गोला के NH-730 रेलवे ओवरब्रिज की दीवारों में दरारें और निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने की रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी।
जुलाई में कार्यदायी संस्था ने ओवरब्रिज का निर्माण पूरा होने का दावा किया था, हालांकि उस समय गुणवत्ता जांच और लोड टेस्टिंग की रिपोर्ट का इंतजार होने की बात भी सामने आई थी।
‘पहले ध्यान दिया जाता तो हादसा टल सकता था’
अब सड़क धंसने की घटना के बाद यही सवाल उठ रहा है कि अगर पहले उठाए गए गुणवत्ता संबंधी सवालों पर समय रहते गंभीरता से कार्रवाई होती, तो क्या सड़क के बीचों-बीच इतना बड़ा गड्ढा बनने की नौबत आती?
नगर पालिका अध्यक्ष रिंकू शुक्ला ने मामले में ठेकेदार और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका आरोप है कि लंबे समय से संबंधित ठेकेदार को काम और एक्सटेंशन मिलता रहा तथा पहले भी इस मुद्दे को दिशा बैठक में उठाया गया था।
रिंकू शुक्ला ने इस पूरे मामले को 2027 के विधानसभा चुनाव से जोड़ते हुए साजिश के आरोप भी लगाए हैं।
अब डीएम ने लिया संज्ञान
मामला सामने आने के बाद जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने भी संज्ञान लिया है। डीएम के मुताबिक उन्हें NH-730 के रेलवे ब्रिज पर गड्ढे की जानकारी मिली है। उन्होंने सड़क को सुचारू रूप से चलाने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं और पूरे मामले की जांच कराने की बात कही है। लखीमपुर खीरी जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर अंजनी कुमार सिंह को वर्तमान जिलाधिकारी के रूप में दर्ज किया गया है।
अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि सड़क धंसने की वास्तविक वजह क्या थी—लगातार बारिश और पानी का दबाव, जलनिकासी की समस्या, निर्माण की तकनीकी खामी या किसी स्तर पर रखरखाव में कमी।
NH-730 लखीमपुर खीरी के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है और इस पर भारी यातायात रहता है। संसद में भी NH-730 के विकास और विभिन्न हिस्सों में सड़क, ROB और फ्लाईओवर से जुड़े कार्यों का उल्लेख किया गया है।
ऐसे में गोला के रेलवे ओवरब्रिज पर सड़क धंसने की घटना ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—क्या पहले उठाई गई शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई होती, तो आज सड़क के बीचों-बीच यह गड्ढा देखने को नहीं मिलता?
अब सभी की नजरें डीएम के आदेश पर होने वाली जांच और उसकी रिपोर्ट पर हैं।



