चेतावनी! आसमां छुएंगे चांदी के दाम, आयात नियमों में बदलाव पर एक्सपर्ट्स ने जताई आशंका

क्या आप भी चांदी में इन्वेस्ट करते हैं और ज्वेलरी खरीदने का प्लान बना रहे हैं या फिर बढ़ती कीमतों से परेशान हैं तो ये खबर आपके लिए काफी जरूरी है. भारत सरकार ने कीमती धातुओं के आयात नियमों को और सख्त कर दिया है. सोने पर ड्यूटी बढ़ाने और ड्यूटी-फ्री लिमिट में बदलाव के बाद अब सरकार ने चांदी के बिजनेस पर भी बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने चांदी की सिल्लियों और अन्य अर्ध-निर्मित चांदी उत्पादों के आयात को प्रतिबंधित श्रेणी में डाल दिया है. इससे आने वाले टाइम में देश में चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.
क्या है सरकार का नया फैसला?
बता दें कि सरकार ने 16 मई 2026 से 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाली चांदी की सिल्लियों और चांदी के अन्य अर्ध-निर्मित रूपों के आयात को प्रतिबंधित श्रेणी में रखा है. इसका मतलब यह है कि अब इनका आयात पहले की तरह आसानी से नहीं हो सकेगा. पिछले साल भारत के टोटल चांदी आयात में इन दोनों श्रेणियों की हिस्सेदारी लगभग 90 प्रतिशत थी.
सरकार ने यह कदम क्यों उठाया?
इस फैसले का मुख्य उद्देश्य देश पर बढ़ते आयात बोझ को कम करना है. मिडिल ईस्ट तनाव, डॉलर पर मजबूती और रुपये के कमजोर होने से भारत के आयात खर्च में तेजी से बढ़ोतरी हुई है.
चांदी आयात पर कितना खर्च हुआ?
व्यापार मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में भारत ने चांदी आयात पर 12 अरब डॉलर खर्च किए. वहीं फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में यह आंकड़ा 4.8 अरब डॉलर था. यानी एक साल में चांदी आयात खर्च में बड़ी छलांग देखी गई.
अप्रैल में आयात में भारी उछाल
अप्रैल 2026 में चांदी आयात में 157 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई तो वहीं पिछले साल इसी महीने यह आंकड़ा 411 मिलियन डॉलर था. भारत मुख्य रूप से United Arab Emirates, United Kingdom और China से चांदी आयात करता है.
क्या पूरी तरह बंद हो गया आयात?
LKP सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी रिसर्ज एक्सपर्ट्स जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, इसका मतलब यह नहीं है कि भारत ने चांदी आयात पूरी तरह बंद कर दिया है. अब चांदी का आयात सिर्फ…
क्या बढ़ेंगी चांदी की कीमतें?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि घरेलू बाजार में कीमतों पर असर पड़ सकता है. आपूर्ति सीमित होने पर चांदी के प्रीमियम बढ़ सकते हैं, यानी भारतीय ग्राहकों को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि भारत बड़ा खरीदार जरूर है, लेकिन वैश्विक कीमत तय नहीं करता.



