“एक अंगूठा… और 550 करोड़ सरकार के नाम!”
स्वामी चिन्मयानंद ने किया ऐसा दान, जिसने पूरे यूपी को चौंका दिया

एक अंगूठा…
और देखते ही देखते 550 करोड़ रुपए की संपत्ति राज्य सरकार के नाम हो गई…
शाहजहांपुर के रजिस्ट्री दफ्तर में हुआ यह दृश्य अब पूरे उत्तर प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है।
पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने ऐसा फैसला लिया जिसने राजनीति, समाज सेवा और शिक्षा जगत में नई बहस छेड़ दी है।

रिपोर्ट अभिषेक सिंह
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में गुरुवार को एक ऐसा ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला जिसने हर किसी को हैरान कर दिया।
पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और मुमुक्ष आश्रम के अधिष्ठाता स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती अचानक तहसील सदर स्थित रजिस्ट्री कार्यालय पहुंचे। शुरुआत में लोगों को लगा कि यह कोई सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया होगी, लेकिन कुछ ही देर बाद पता चला कि यहां करोड़ों रुपए की संपत्ति दान की जा रही है।
स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने मुमुक्ष आश्रम की लगभग 550 करोड़ रुपए की संपत्ति राज्य सरकार की यूनिवर्सिटी के नाम समर्पित कर दी। खास बात यह रही कि पूरी प्रक्रिया बायोमेट्रिक सत्यापन के जरिए पूरी हुई। जैसे ही स्वामी चिन्मयानंद ने मशीन पर अंगूठा लगाया, वैसे ही करोड़ों की संपत्ति आधिकारिक रूप से विश्वविद्यालय के नाम दर्ज हो गई।
दरअसल स्वामी चिन्मयानंद लंबे समय से शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। वह स्वामी सुखदेवानंद डिग्री कॉलेज और मुमुक्ष आश्रम के अधिष्ठाता हैं। हाल ही में स्वामी सुखदेवानंद महाविद्यालय को विश्वविद्यालय का दर्जा मिला है। इसके बाद उन्होंने यह बड़ा फैसला लिया।
रजिस्ट्री कार्यालय में इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों और शिक्षा विभाग के प्रतिनिधियों की मौजूदगी रही। राज्यपाल की ओर से उच्च शिक्षा अधिकारी बरेली प्रोफेसर सुधीर चौहान ने इस रजिस्ट्री को स्वीकार किया। पूरे घटनाक्रम के दौरान वहां मौजूद लोग इस फैसले को ऐतिहासिक बताते नजर आए।
https://youtu.be/QiktzIVhaks
स्वामी चिन्मयानंद ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जब उन्होंने इस डिग्री कॉलेज की शुरुआत की थी, तब क्षेत्र का माहौल बिल्कुल अलग था। उन्होंने कहा कि उस दौर में युवाओं के हाथों में कट्टे हुआ करते थे, लेकिन आज उन्हीं युवाओं के हाथों में कलम है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा ही समाज को बदल सकती है और यही वजह है कि उन्होंने अपनी पूरी संपत्ति समाज के नाम समर्पित करने का फैसला लिया।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने साफ कहा कि वह यह संपत्ति किसी सरकार को नहीं बल्कि समाज को समर्पित कर रहे हैं। उनका मानना है कि विश्वविद्यालय बनने के बाद यहां युवाओं को आधुनिक, तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा मिलेगी जिससे रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे। उन्होंने कहा कि अगर शिक्षा मजबूत होगी तो समाज अपने आप मजबूत हो जाएगा।
इस दौरान स्वामी चिन्मयानंद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें विश्वविद्यालय का कुलाधिपति बनाने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया।
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी पद पर बैठना नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है।
राजनीतिक गलियारों में भी इस फैसले की चर्चा तेज हो गई है। लोग इसे उत्तर प्रदेश के शिक्षा इतिहास का बड़ा कदम बता रहे हैं। कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने स्वामी चिन्मयानंद के इस फैसले की सराहना की है।
शाहजहांपुर के रजिस्ट्री कार्यालय में हुई यह प्रक्रिया अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। लोग इसे “एक अंगूठा और 550 करोड़ दान” के नाम से शेयर कर रहे हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि आने वाले समय में यह विश्वविद्यालय क्षेत्र के युवाओं के लिए कितने नए अवसर पैदा करता है। लेकिन इतना तय है कि स्वामी चिन्मयानंद का यह फैसला लंबे समय तक चर्चा में रहने वाला है।

