“स्मैक के दलदल में डूबता पलिया, पुलिस के दावे ध्वस्त! खंडहरों में नशे की महफिल और सवालों के घेरे में कार्रवाई”
वायरल वीडियो ने खोली हकीकत, छोटे कैरियर पकड़कर वाहवाही और बड़े सौदागर अब भी बेखौफ; युवाओं की जिंदगी बचाने की उठी मार्मिक गुहार

जब खंडहरों में खुलेआम नशे की महफिल सज रही हो, जब नाबालिग और युवा स्मैक के दलदल में धंस रहे हों, तब सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर पुलिस के दावे जमीन पर क्यों नहीं उतर रहे?
पलिया में स्मैक का जहर, वायरल वीडियो ने फिर खोली हकीकत
लखीमपुर खीरी के पलिया कोतवाली क्षेत्र में नशीले पदार्थ स्मैक का कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा वायरल वीडियो ने एक बार फिर पुलिस के उन दावों की पोल खोल दी है, जिनमें बार-बार कहा जाता रहा है कि क्षेत्र में नशे के कारोबार पर शिकंजा कस दिया गया है। वायरल वीडियो में एक खंडहरनुमा मकान के अंदर पांच से छह युवक कथित तौर पर स्मैक का सेवन करते दिखाई दे रहे हैं। यह दृश्य कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें कथित तौर पर तराजू से तौलकर स्मैक बेचे जाने की तस्वीरें सामने आई थीं। उस समय भी पुलिस ने कार्रवाई और सख्ती के दावे किए थे, लेकिन आज फिर सामने आई तस्वीरें यह बताने के लिए काफी हैं कि जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
छोटे कैरियर पर कार्रवाई, बड़े सौदागर अब भी दूर?
क्षेत्र में अक्सर एक या दो ग्राम से लेकर पांच ग्राम तक स्मैक के साथ लोगों की गिरफ्तारी की खबरें सामने आती हैं। पुलिस इन्हें बड़ी सफलता बताकर अपनी पीठ थपथपाती नजर आती है, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि अब तक इस अवैध कारोबार के बड़े सरगनाओं तक पुलिस के हाथ नहीं पहुंचे हैं। सवाल उठ रहा है कि आखिर छोटे कैरियर पकड़ने से क्या नशे का नेटवर्क खत्म हो जाएगा?
लोगों का कहना है कि जब तक इस कारोबार को संचालित करने वाले बड़े तस्करों पर कठोर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक युवा पीढ़ी को बचा पाना मुश्किल होगा।
एक साल से अधिक समय से जमे कोतवाल, फिर भी नहीं टूटा रैकेट
पलिया कोतवाली में एक वर्ष से अधिक समय से तैनात प्रभारी निरीक्षक पंकज त्रिपाठी के कार्यकाल में भी स्मैक का नेटवर्क खत्म नहीं हो सका है। लगातार वायरल हो रहे वीडियो और सामने आ रहे आरोप उनकी कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं। आखिर जब बार-बार नशे के कारोबार की शिकायतें सामने आ रही हैं, तब इस नेटवर्क को ध्वस्त करने में सफलता क्यों नहीं मिल पा रही?
नशे की गिरफ्त में नाबालिग और युवा
सबसे चिंताजनक बात यह है कि स्मैक का जाल अब नाबालिगों से लेकर 25 वर्ष तक के युवक-युवतियों को अपनी गिरफ्त में ले चुका है। कई परिवार अपने बच्चों को इस दलदल से निकालने के लिए परेशान हैं। माता-पिता की आंखों के सामने उनके बच्चों का भविष्य बर्बाद हो रहा है, लेकिन नशे का यह जाल लगातार फैलता जा रहा है।
नेपाल से आने वाले युवाओं के वीडियो भी हो चुके हैं वायरल
स्थानीय लोगों के अनुसार बड़ी संख्या में नेपाली युवक और युवतियां भी पलिया पहुंचकर स्मैक का सेवन करते हैं। कई बार ऐसे वीडियो वायरल हो चुके हैं, जिनमें नशे में धुत युवक-युवतियां सड़कों पर पड़े दिखाई दिए। यह स्थिति न केवल सामाजिक चिंता का विषय है बल्कि सीमावर्ती क्षेत्र की सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
आखिर कब जागेंगे जिम्मेदार?
आज जरूरत केवल छोटे-मोटे मामलों में कार्रवाई दिखाने की नहीं, बल्कि उस पूरे नेटवर्क को तोड़ने की है जो युवाओं की जिंदगी को निगल रहा है। क्षेत्र के बुद्धिजीवियों और अभिभावकों का कहना है कि प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और समाज के जिम्मेदार लोगों को राजनीति और बयानबाजी से ऊपर उठकर इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए आगे आना होगा।
अगर समय रहते इस जहर पर रोक नहीं लगी, तो आने वाले वर्षों में पलिया की एक पूरी पीढ़ी नशे की भेंट चढ़ सकती है। सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस दर्द को समझेंगे, या फिर वायरल वीडियो आते रहेंगे और दावों के महल ताश के पत्तों की तरह बिखरते रहेंगे?



