उत्तरप्रदेशलखीमपुर खीरी

“क्या सांसदों को अंधेरे में रख रहा है प्रशासन? दिशा बैठक में आनंद भदौरिया का बड़ा सवाल, ‘क्या हम पाकिस्तान के सांसद हैं?'”

दिशा बैठक में विकास योजनाओं से ज्यादा गूंजा जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का मुद्दा, अधिकारियों पर सूचना छिपाने के आरोपों से गरमाई सियासत

लखीमपुर खीरी की दिशा बैठक में उस वक्त माहौल गर्म हो गया जब धौरहरा सांसद आनंद भदौरिया ने अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए सवाल दाग दिया—”क्या हम कहीं पाकिस्तान के सांसद तो नहीं हैं?” सांसद के इस बयान ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

लखीमपुर खीरी में बुधवार को आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक विकास योजनाओं की समीक्षा से ज्यादा जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच समन्वय को लेकर उठे सवालों के कारण चर्चा में रही। बैठक के दौरान धौरहरा सांसद आनंद भदौरिया ने अधिकारियों के कार्यप्रणाली पर खुलकर नाराजगी जाहिर की और आरोप लगाया कि उनके संसदीय क्षेत्र में होने वाले उद्घाटनों, शिलान्यासों और सरकारी योजनाओं की जानकारी उन्हें समय पर नहीं दी जाती।
कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में उस समय माहौल गंभीर हो गया जब सांसद आनंद भदौरिया ने कहा, “हम कहीं पाकिस्तान के सांसद तो नहीं हैं, हम भी भारत के सांसद हैं। हमारे संसदीय क्षेत्र में किसी योजना का उद्घाटन हो, किसी परियोजना का शुभारंभ हो या कोई सरकारी कार्यक्रम हो, इसकी जानकारी तक हमें नहीं दी जाती।”

सांसद के इस बयान ने बैठक में मौजूद अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। भदौरिया ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुने हुए जनप्रतिनिधियों को नजरअंदाज करना उचित नहीं है। उन्होंने अधिकारियों को शासन की योजनाओं का गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों के साथ बेहतर समन्वय बनाए रखने की भी नसीहत दी।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे खीरी सांसद उत्कर्ष वर्मा ‘मधुर’ ने भी कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। उन्होंने जल जीवन मिशन के तहत शत-प्रतिशत घरों तक पाइपलाइन पहुंचाने पर जोर दिया और पाइपलाइन बिछाने के दौरान क्षतिग्रस्त हुई सड़कों की गुणवत्तापूर्ण मरम्मत सुनिश्चित कराने की मांग की। उन्होंने इस विषय पर जिलाधिकारी से अलग बैठक बुलाने का भी आग्रह किया।
दिशा बैठक में लखीमपुर-गोला मार्ग पर निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। अधिकारियों ने बताया कि पुल में सामने आई तकनीकी समस्या की जांच मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान से कराई गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कार्य किए जाएंगे और संतोषजनक परीक्षण के बाद ही पुल को जनता के लिए खोला जाएगा।
बैठक के दौरान सांसद उत्कर्ष वर्मा ने विकास कार्यों के शिलापट्टों पर जनप्रतिनिधियों के नाम अंकित न किए जाने का मुद्दा भी उठाया। इस पर जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने संबंधित विभागों को शासनादेश का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए।
किसानों से जुड़े मुद्दे भी बैठक में प्रमुखता से उठाए गए। सांसदों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाने, पात्र किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने और पशुधन बीमा से संबंधित शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने पर जोर दिया। सांसदों ने यह भी कहा कि बीमित पशुओं की मृत्यु के बाद रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया में पशुपालकों का किसी प्रकार का शोषण नहीं होना चाहिए।
धौरहरा सांसद आनंद भदौरिया ने अपने क्षेत्र की सड़क सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने दिलावलपुर-मोहम्मदी और बरबर-मोहम्मदी मार्ग पर लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं का जिक्र करते हुए रंबल स्ट्रिप बनवाने की मांग की। साथ ही मोहम्मदी कस्बे में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए बाईपास निर्माण का प्रस्ताव तैयार करने की आवश्यकता बताई।
बैठक में स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास और बाढ़ नियंत्रण से जुड़ी योजनाओं की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि जिले में 1.39 लाख आभा आईडी बनाई जा चुकी हैं। दिव्यांगजन शिविरों के माध्यम से 520 लाभार्थियों का चयन उपकरण वितरण के लिए किया गया है। वहीं शिक्षा विभाग ने आधुनिक पुस्तकालय भवन और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की जानकारी साझा की।
बाढ़ एवं कटान निरोधक परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि जिले में संचालित 12 परियोजनाओं में लगभग 75 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। शेष कार्य भी निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।

बैठक में गोला नगर पालिका अध्यक्ष विजय शुक्ल ‘रिंकू’ ने भी जल निगम (शहरी) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सड़क खुदाई के बाद समय पर मरम्मत नहीं कराई जा रही, जिससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारियों ने जवाब देते हुए कहा कि 60 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और शेष कार्य सावन से पहले पूरा कर लिया जाएगा।
हालांकि बैठक में विकास योजनाओं की समीक्षा और उपलब्धियों का ब्यौरा भी प्रस्तुत किया गया, लेकिन सबसे अधिक चर्चा सांसद आनंद भदौरिया के उस बयान की रही जिसमें उन्होंने अधिकारियों द्वारा जनप्रतिनिधियों की कथित अनदेखी पर सवाल उठाए। अब राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि आखिर ऐसी कौन सी वजह है कि एक सांसद को सार्वजनिक मंच से यह कहना पड़ा कि उन्हें अपने ही संसदीय क्षेत्र की योजनाओं की जानकारी नहीं दी जाती। यह सवाल प्रशासनिक कार्यशैली और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय को लेकर नई बहस छेड़ रहा है।

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!