उत्तरप्रदेशलखीमपुर खीरी

दुल्हन बना थाना खीरी, बिछा कारपेट… मगर साहब आए नहीं! इंतजार में धरी रह गई सारी तैयारी

आईजी के संभावित दौरे की खबर पर चमक उठा थाना, फरियादी बोले- साहब चाहे न आएं, लेकिन ऐसे दौरे होते रहें तो थाने की किस्मत बदल जाएगी

बड़े अधिकारियों के दौरे की खबर सुनकर सिर्फ अफसर ही नहीं, थाने भी जवान हो जाते हैं। कुछ ऐसा ही नजारा थाना खीरी में देखने को मिला। आईजी रेंज लखनऊ एस. किरण के संभावित निरीक्षण की सूचना मिलते ही थाना ऐसा सजाया गया कि मानो बारात आने वाली हो। सड़क पर कारपेट बिछा, कुर्सियां चमकीं, सफाई हुई, लेकिन शाम तक इंतजार ही इंतजार रहा… और साहब आए ही नहीं!

लखीमपुर खीरी में शुक्रवार को थाना खीरी का नजारा किसी शादी समारोह से कम नहीं था। आईजी रेंज लखनऊ एस. किरण के संभावित निरीक्षण की सूचना मिलते ही सुबह से ही पुलिसकर्मी तैयारियों में जुट गए। झाड़ू-पोछा, रंग-रोगन, कुर्सियों की व्यवस्था और सड़क पर बिछे कारपेट देखकर ऐसा लग रहा था कि मानो किसी वीआईपी बारात का स्वागत होना हो।
थाने के अंदर और बाहर हर तरफ साफ-सफाई का ऐसा माहौल था कि कई पुराने पुलिसकर्मियों को भी यकीन नहीं हो रहा था कि यह वही थाना है, जहां रोजमर्रा की व्यस्तता के बीच धूल भी आराम से बैठ जाती है।
कारपेट देख फरियादी भी हुए खुश

थाने पहुंचे कुछ फरियादियों की खुशी भी देखते बन रही थी। एक फरियादी मुस्कुराते हुए बोला, “अगर बड़े अधिकारियों का दौरा इसी तरह लगता रहे तो थाने में रोज सफाई रहे और कारपेट भी बिछा रहे।”
दूसरे फरियादी ने चुटकी लेते हुए कहा, “हम तो पहली बार थाने में ऐसे चल रहे हैं जैसे किसी शादी समारोह में आए हों। बस मिठाई की कमी रह गई है।”
हर नजर गेट पर, लेकिन साहब का काफिला नहीं आया
दिनभर पुलिसकर्मियों की नजरें थाने के गेट पर टिकी रहीं। हर गाड़ी की आवाज पर लगता कि शायद अब आईजी साहब पहुंचने वाले हैं। लेकिन शाम तक इंतजार ही इंतजार रहा और आईजी रेंज लखनऊ थाना खीरी नहीं पहुंचे।
इसके बाद थाने में चर्चा शुरू हो गई कि “इतनी मेहनत के बाद भी साहब की नजर नहीं पड़ सकी।”
मेहनत पर फिरा पानी, लेकिन चमक गया थाना
हालांकि आईजी एस. किरण ने जिले के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर लंबित विवेचनाओं, महिला अपराधों और आगामी त्योहारों को लेकर जरूरी दिशा-निर्देश दिए, लेकिन थाना खीरी में दिनभर चली तैयारियां लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गईं।
पुलिसकर्मियों के बीच भी मजाकिया अंदाज में बातें होती रहीं। कोई कह रहा था, “थाना तो दुल्हन बन गया था, लेकिन बारात रास्ता बदल गई।” तो कोई बोला, “साहब के आने की खबर ने इतना असर किया कि कई दिनों की सफाई एक दिन में हो गई।”
जनता की भी खास मांग
इस पूरे घटनाक्रम के बाद कुछ फरियादियों ने हंसते हुए एक नई मांग भी रख दी। उनका कहना था कि बड़े अधिकारियों के दौरे नियमित होने चाहिए, ताकि थाने में इसी तरह सफाई, व्यवस्था और कारपेट का इंतजाम बना रहे।
आखिरकार थाना खीरी की इस “अधूरी मेहमाननवाजी” की कहानी पूरे दिन लोगों के बीच मुस्कुराहट और चर्चा का विषय बनी रही।

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!