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“मुकदमा VS प्रदर्शन… रोमी साहनी VS मनोज पैंथर… 15 जून को पलिया में होगा बड़ा खेल? आखिर कौन पड़ेगा किस पर भारी?”

'पाकिस्तान' वाले बयान पर मुकदमा, मोतीपुर हिंसा कांड से लेकर 406 केस तक पुराने आरोप फिर चर्चा में, दलित पैंथर ने दी खुली चुनौती

मुकदमा दर्ज हो गया… चुनौती भी दे दी गई… और अब 15 जून को पलिया में शक्ति प्रदर्शन का ऐलान! क्या रोमी साहनी और मनोज पैंथर की लड़ाई खीरी की सबसे बड़ी राजनीतिक कंट्रोवर्सी बन चुकी है?”

लखीमपुर खीरी की पलिया विधानसभा 15 जून को एक बड़े राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन की गवाह बन सकती है। भारतीय दलित पैंथर संगठन ने पलिया मुख्यालय पर भाजपा विधायक रोमी साहनी के खिलाफ बड़े प्रदर्शन का ऐलान किया है। इस ऐलान के बाद जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। खास बात यह है कि यह प्रदर्शन ऐसे समय में होने जा रहा है, जब दलित पैंथर के राष्ट्रीय संयोजक मनोज कुमार भारती उर्फ मनोज पैंथर और पलिया विधायक रोमी साहनी के बीच आरोप-प्रत्यारोप की लड़ाई चरम पर पहुंच चुकी है।
प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले मनोज पैंथर के खिलाफ पलिया थाने में मुकदमा दर्ज हो चुका है। भाजपा कार्यकर्ता अभिनंदन पुत्र देवनारायण निवासी विसेनपुरी, थाना संपूर्णानगर की तहरीर पर 10 जून को मनोज पैंथर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 196, 353(2), 356(1) और आईटी एक्ट की धारा 66-डी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। आरोप है कि मनोज पैंथर ने सार्वजनिक बयान में पलिया विधायक रोमी साहनी के लिए “पाकिस्तान” शब्द का इस्तेमाल किया था, जिसके बाद भाजपा कार्यकर्ताओं में आक्रोश फैल गया।
हालांकि इस सियासी टकराव की जड़ें दो महीने पहले बांकेगंज क्षेत्र के मोतीपुर गांव में हुए अंबेडकर मूर्ति विवाद से जुड़ी हुई हैं। 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती के अवसर पर बौद्ध विहार के पास स्थित सरकारी और विवादित भूमि पर डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करने को लेकर दलित समुदाय के दो पक्ष आमने-सामने आ गए थे। आरोप है कि बिना अनुमति मूर्ति स्थापना के प्रयास के दौरान धक्का-मुक्की हुई और प्रतिमा क्षतिग्रस्त हो गई।
मूर्ति टूटने की खबर फैलते ही माहौल हिंसक हो गया। विरोध कर रही चंदा देवी के साथ मारपीट की गई। इसके बाद उग्र भीड़ ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर पथराव कर दिया। सीओ और नायब तहसीलदार के वाहनों समेत कई सरकारी गाड़ियों में तोड़फोड़ और आगजनी की गई। पुलिस ने दो मुकदमे दर्ज करते हुए कई नामजद और लगभग 200 अज्ञात लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। अब तक 38 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
मोतीपुर हिंसा कांड के बाद भारतीय दलित पैंथर संगठन खुलकर मैदान में उतर आया। संगठन के राष्ट्रीय संयोजक मनोज पैंथर ने पुलिस कार्रवाई को एकतरफा बताते हुए आरोप लगाया कि निर्दोष दलितों को जेल भेजा गया है और महिलाओं तथा बच्चों के साथ भी मारपीट और उत्पीड़न किया गया। दलित पैंथर संगठन ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजकर मैलानी पुलिस और तत्कालीन क्षेत्राधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
इसी दौरान कुछ पीड़ित परिवारों और महिलाओं ने भाजपा विधायक रोमी साहनी से मुलाकात की। इन परिवारों ने आरोप लगाया कि पहले हुए अंबेडकर पार्क विवाद और आर्थिक सहायता से जुड़े मामलों में उनके साथ धोखाधड़ी हुई है। उन्होंने मनोज पैंथर पर सहायता राशि में अनियमितता के आरोप लगाए और न्याय की मांग की।
इस बीच वर्ष 2023 में थाना नीमगांव में दर्ज मुकदमा संख्या 108/23 भी एक बार फिर चर्चा में आ गया। ग्राम कोरैया निवासी शांति देवी पत्नी अशोक कुमार की तहरीर पर धारा 406 आईपीसी के तहत यह मुकदमा दर्ज हुआ था। शिकायत के अनुसार घटना 7 दिसंबर 2021 की थी, जबकि रिपोर्ट 22 अप्रैल 2023 को दर्ज हुई थी। इस मामले में मनोज भारती, परविंदर भारती, प्रियंका भारती और हेमराज को आरोपी बनाया गया था। आरोप अमानत में खयानत से संबंधित थे।
बताया जाता है कि इसी मामले में कुछ महिलाओं ने मनोज पैंथर के खिलाफ आर्थिक गड़बड़ी के आरोप लगाए थे। इसके बाद विधायक रोमी साहनी ने पीड़ित महिलाओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। वहीं मनोज पैंथर और उनके समर्थकों का आरोप है कि यह सब उनके आंदोलन को दबाने और उन्हें बदनाम करने की सुनियोजित राजनीतिक साजिश का हिस्सा है।
मुकदमा दर्ज होने के बाद भी मनोज पैंथर अपने बयान पर कायम हैं। उनका कहना है कि उन पर चाहे जितने मुकदमे दर्ज कर दिए जाएं, वह पीड़ित, शोषित और मजलूम लोगों की आवाज उठाते रहेंगे। उन्होंने साफ कहा है कि वह अपने बयान से पीछे नहीं हटेंगे और अदालत में इसका जवाब देंगे। साथ ही उन्होंने 15 जून को पलिया में हर हाल में बड़ा प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।
मनोज पैंथर का आरोप है कि मोतीपुर कांड में कानून का इस्तेमाल एकतरफा किया गया। उनका कहना है कि यदि दोनों पक्षों में विवाद हुआ था तो चंदा देवी के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी जमीन पर कब्जे की कोशिश करने वालों को संरक्षण दिया गया और विधायक के प्रभाव में प्रशासन ने निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की। उन्होंने विधायक रोमी साहनी की भूमिका की सीबीआई जांच कराने की भी मांग उठाई है।
दूसरी तरफ पलिया विधायक रोमी साहनी ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि मोतीपुर कांड से उनका कोई लेना-देना नहीं है। क्षेत्र की जनता उनके लिए भगवान के समान है और वह हमेशा हर वर्ग के लोगों के साथ खड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें और भाजपा को बदनाम करने के लिए सुनियोजित तरीके से झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। साथ ही उन्होंने पुलिस प्रशासन से अपील की है कि किसी भी निर्दोष को जेल न भेजा जाए और पूरी जांच के बाद ही कार्रवाई की जाए।
उधर मैलानी थाना प्रभारी बृजेश मौर्य का कहना है कि मोतीपुर हिंसा कांड में शामिल किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा और सभी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं प्रशासन का कहना है कि 15 जून को प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए अभी तक किसी भी संगठन की ओर से अनुमति नहीं मांगी गई है।
ऐसे में अब सबकी निगाहें 15 जून पर टिकी हैं। देखना होगा कि दलित पैंथर का यह प्रदर्शन कितना बड़ा होता है और क्या मनोज पैंथर और रोमी साहनी के बीच शुरू हुआ यह राजनीतिक टकराव आने वाले दिनों में जिले की राजनीति में और बड़ा मुद्दा बनता है।

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