मां को खुश रखने के लिए बना ‘ब्रिगेडियर’, लेकिन एक झूठ ने पहुंचा दिया सलाखों के पीछे

“एक बेटा… एक सपना… एक झूठ… और फिर हथकड़ी! आखिर क्यों 20 साल के आर्यन ने खुद को सेना का ब्रिगेडियर बताया? मां को खुश रखने के लिए रची गई कहानी का ऐसा अंत होगा, किसी ने नहीं सोचा था…”
रिपोर्ट :अभिषेक सिंह चौहान
शाहजहांपुर में सामने आई एक कहानी ने हर किसी को हैरान कर दिया है। यह कहानी किसी शातिर ठग या जालसाज की नहीं, बल्कि एक ऐसे बेटे की है जो अपनी मां को दुखी नहीं देखना चाहता था। लेकिन मां के चेहरे पर खुशी बनाए रखने के लिए बोला गया एक झूठ धीरे-धीरे इतना बड़ा होता चला गया कि आखिरकार उसी झूठ ने उसे सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।
शहीद संग्रहालय से फर्जी ब्रिगेडियर के रूप में गिरफ्तार किए गए 20 वर्षीय आर्यन वर्मा की कहानी इन दिनों पूरे शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है। पुलिस पूछताछ में सामने आई जानकारी के मुताबिक आर्यन का सपना सेना में डॉक्टर बनने का था। इसके लिए उसने प्रतिष्ठित सशस्त्र सेना चिकित्सा महाविद्यालय (AFMC) में प्रवेश पाने की कोशिश की और NEET की परीक्षा भी दी, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी।
पुलिस के मुताबिक, असफलता के बाद आर्यन सबसे ज्यादा अपनी मां को लेकर परेशान था। उसकी मां हृदय रोग से पीड़ित हैं और वह नहीं चाहता था कि उसकी नाकामी से उन्हें कोई सदमा पहुंचे। इसी वजह से उसने परिवार से झूठ बोल दिया कि उसका चयन AFMC में डॉक्टर के रूप में हो गया है।
लेकिन एक झूठ को सच साबित करने के लिए उसे लगातार नए-नए झूठ गढ़ने पड़े। उसने नोएडा और गुरुग्राम से सेना की वर्दी और उससे जुड़े सामान जुटाए। इतना ही नहीं, पिता की टाटा हैरियर कार पर सेना से जुड़े प्रतीक चिन्ह भी लगवा लिए। धीरे-धीरे उसने खुद को सेना का अधिकारी बताना शुरू कर दिया और लोगों के बीच वह खुद को ब्रिगेडियर के रूप में पेश करने लगा।
शुक्रवार को उसकी कहानी का सबसे बड़ा मोड़ उस समय आया जब वह शाहजहांपुर के शहीद संग्रहालय पहुंचा। वहां मौजूद कुछ पूर्व सैनिकों को उसकी गतिविधियां और बातचीत संदिग्ध लगी। जब उससे सेना से जुड़े सवाल पूछे गए तो वह संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया। शक गहराने पर सेना के अधिकारियों को सूचना दी गई।
इसके बाद सदर बाजार पुलिस मौके पर पहुंची और आर्यन को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। शुरुआती पूछताछ में ही उसके दावों की परतें खुलने लगीं। बाद में उसने स्वीकार किया कि वह सेना का कोई अधिकारी नहीं है और उसने यह पूरा झूठ अपनी मां को खुश रखने और उन्हें अपनी असफलता का दुख न पहुंचाने के लिए बोला था।
घटना सामने आने के बाद शहर में इस मामले की खूब चर्चा हो रही है। लोग यह जानकर हैरान हैं कि मां के प्रति प्यार और उनकी बीमारी के कारण शुरू हुआ एक झूठ आखिरकार बेटे की गिरफ्तारी तक पहुंच गया। हालांकि, फर्जी पहचान अपनाना और सेना की वर्दी का गलत इस्तेमाल करना गंभीर अपराध माना जाता है और इसी वजह से पुलिस अब मामले में विधिक कार्रवाई कर रही है।
इस पूरी घटना के बीच सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जिस मां को दुख से बचाने के लिए बेटे ने यह कहानी रची, बेटे की गिरफ्तारी और सच्चाई सामने आने के बाद उस मां पर क्या बीत रही होगी? आखिर क्या एक बेटे का अपनी मां के लिए प्यार उसे कानून तोड़ने की इजाजत दे सकता है, या फिर सच को छिपाने की कोशिश हमेशा किसी बड़े संकट को जन्म देती है?
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आर्यन ने कहीं इस फर्जी पहचान का इस्तेमाल किसी अन्य उद्देश्य या लाभ के लिए तो नहीं किया था। लेकिन एक बात जरूर है कि यह कहानी सिर्फ कानून तोड़ने की नहीं, बल्कि सपनों, असफलता, भावनाओं और एक ऐसे झूठ की है, जिसने आखिरकार सब कुछ उजागर कर दिया।



