उत्तरप्रदेशपीलीभीत

आखिर क्यों होगी 1.31 लाख परिवारों की दोबारा पड़ताल? खुली बैठकों में खुलेगा बड़ा राज!

प्रधानमंत्री आवास योजना में पात्र और अपात्र की होगी नई छंटनी, गांव-गांव खुलेगी जांच की परतें, राशन दुकानों की भी जांच में सामने आई हकीकत

क्या प्रधानमंत्री आवास योजना में किसी अपात्र को मिला फायदा? क्या गरीबों का हक किसी और ने छीन लिया? अब गांव की खुली बैठकों में होगा फैसला और 1.31 लाख परिवारों की किस्मत पर फिर चलेगी जांच की कलम।

पीलीभीत जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत लाभार्थियों के चयन और सत्यापन की प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा में है। जिले के 1 लाख 31 हजार परिवारों की पात्रता की जांच अब खुली बैठकों के जरिए की जाएगी। प्रशासन का दावा है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और यह साफ हो सकेगा कि कौन वास्तव में योजना का हकदार है और किसे सूची से बाहर किया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के अंतर्गत वर्ष 2024 में कराए गए सर्वेक्षण के आधार पर लाभार्थियों की सूची तैयार की गई थी। इसी सूची में शामिल परिवारों की पात्रता का सत्यापन अब गांव स्तर पर किया जाएगा। इसके लिए 21 जून से लेकर 1 जुलाई तक जिले की सभी 720 ग्राम पंचायतों में खुली बैठकों का आयोजन किया जाएगा।
इन बैठकों में ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और ग्रामीणों की मौजूदगी में लाभार्थियों के नामों पर चर्चा होगी। ग्राम सभाओं में ही यह तय होगा कि कौन पात्र है और किसके नाम पर आपत्ति दर्ज की जानी चाहिए। बैठक के दौरान प्राप्त आपत्तियों और सुझावों के आधार पर अंतिम सूची तैयार की जाएगी।
2016-17 से अब तक 54,775 परिवारों को मिला आवास
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत वर्ष 2016-17 से अब तक जिले में 54 हजार 775 जरूरतमंद परिवारों को आवास उपलब्ध कराए जा चुके हैं। वर्ष 2024 में केंद्र सरकार की ओर से गरीब परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराने के लिए नया सर्वे कराया गया था। सर्वे में सातों ब्लॉकों के कुल 1 लाख 31 हजार 645 परिवारों को सूची में शामिल किया गया था।
अब इसी सूची की सत्यता की जांच गांव स्तर पर की जाएगी, ताकि कोई अपात्र व्यक्ति योजना का लाभ न उठा सके और जरूरतमंद परिवारों को उनका अधिकार मिल सके।
पात्र पाए जाने पर मिलेगी 1.20 लाख रुपये की सहायता
योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को आवास निर्माण के लिए 1 लाख 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। इसके अलावा मनरेगा और अन्य योजनाओं के माध्यम से भी अतिरिक्त सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। प्रशासन का कहना है कि खुली बैठकों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सरकारी योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचे।
राशन दुकानों की जांच में सामने आई हकीकत
उधर, पीलीभीत में खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग की टीम ने ललौरीखेड़ा क्षेत्र की राशन दुकानों का निरीक्षण किया। क्षेत्रीय निरीक्षक नागर पालिका के नेतृत्व में गांव चयापुर, रूद्रपुरा और अन्य स्थानों की उचित दर दुकानों का जायजा लिया गया।
निरीक्षण के दौरान दुकानों पर प्रदर्शित अनिवार्य सूचनाओं, लाभार्थियों की सूची और हेल्पलाइन नंबर आदि की जांच की गई। टीम ने कोटेदारों को निर्देश दिए कि खाद्यान्न वितरण में पूरी पारदर्शिता बरती जाए और गुणवत्ता से कोई समझौता न किया जाए। साथ ही वितरण प्रक्रिया के दौरान स्वच्छता और अन्य नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
प्रशासन का मानना है कि आवास योजना हो या राशन वितरण व्यवस्था, दोनों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए लगातार निगरानी और जनभागीदारी जरूरी है। यही वजह है कि अब गांव-गांव खुली बैठकों के जरिए लाभार्थियों की पड़ताल की जाएगी और पात्रता का फैसला सार्वजनिक रूप से किया जाएगा।

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