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लव जिहाद या पुलिस की लापरवाही? एसपी ऑफिस पर फूटा गुस्सा, मां की बिगड़ी तबीयत के बाद उठे बड़े सवाल

परिजनों को बिना बताए लिए गए युवती के बयान? नीमगांव पुलिस पर गंभीर आरोप, हिन्दू संगठनों ने पूछा- आखिर किसे बचा रही है पुलिस?

लखीमपुर खीरी में कथित लव जिहाद के एक मामले ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का आरोप है कि युवती के बयान उनकी अनुपस्थिति में दर्ज किए गए, शिकायत करने पर उन्हें प्रताड़ित किया गया और पूरे मामले में पुलिस की भूमिका संदिग्ध दिखाई दे रही है। इसी नाराजगी के बीच सैकड़ों हिन्दू संगठन कार्यकर्ता एसपी कार्यालय पहुंच गए। नारेबाजी, हंगामा और प्रदर्शन के बीच पीड़िता की मां की तबीयत बिगड़ गई। अब सवाल यह है कि क्या पुलिस निष्पक्ष जांच कर रही है या फिर कहीं न कहीं मामले को दबाने की कोशिश हो रही है?

रिपोर्ट -राहुल गुप्ता

लखीमपुर खीरी जिले में कथित लव जिहाद के एक मामले को लेकर सोमवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बाहर भारी हंगामा देखने को मिला। अखिल भारत हिन्दू महासभा समेत विभिन्न हिन्दू संगठनों के सैकड़ों कार्यकर्ता पीड़ित परिवार के साथ एसपी कार्यालय पहुंचे और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस पूरे मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रही है। वहीं पीड़ित परिवार ने नीमगांव थाना पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
क्या युवती के बयान परिजनों को बिना बताए दर्ज किए गए?
पूरा मामला नीमगांव थाना क्षेत्र से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि मितौली क्षेत्र निवासी इरफान गाजी 23 मई को एक युवती को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया था। परिजनों की तहरीर पर 26 मई को मुकदमा दर्ज किया गया।
बाद में पुलिस ने युवती को बरामद कर वन स्टॉप सेंटर भेज दिया।
लेकिन विवाद तब शुरू हुआ जब परिजनों ने आरोप लगाया कि युवती के बयान उनकी मौजूदगी में नहीं लिए गए। इतना ही नहीं, परिजनों का आरोप है कि जब उन्होंने इस पर आपत्ति जताई तो उन्हें थाने में प्रताड़ित किया गया।
यहीं से पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई।
एसपी ऑफिस के बाहर दो घंटे तक हंगामा
मामले को लेकर विभिन्न हिन्दू संगठनों ने मोर्चा खोल दिया। सैकड़ों कार्यकर्ता एसपी कार्यालय पहुंचे और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि जिले में लगातार ऐसे मामले सामने आ रहे हैं लेकिन पुलिस की कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित दिखाई देती है।
करीब दो घंटे तक चले प्रदर्शन के दौरान एसपी कार्यालय के बाहर भारी भीड़ जमा रही और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी होती रही।
पीड़िता की मां की बिगड़ी तबीयत, मचा हड़कंप
प्रदर्शन के दौरान अचानक पीड़िता की मां की तबीयत बिगड़ गई।
महिला की हालत खराब होते ही मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। आनन-फानन में एंबुलेंस बुलाई गई और उन्हें उपचार के लिए भेजा गया।
इस घटना ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि न्याय के लिए दर-दर भटक रहे परिवार की स्थिति प्रशासन को दिखाई नहीं दे रही है।
हिन्दू संगठनों ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
अखिल भारत हिन्दू महासभा के जिला अध्यक्ष विनोद गुप्ता ने आरोप लगाया कि जिले में हिन्दू युवतियों को प्रेमजाल में फंसाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं लेकिन पुलिस अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखा रही है।
वहीं हिन्दूवादी नेता आचार्य संजय मिश्रा ने पुलिस विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यदि ऐसे मामलों में समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा जन आंदोलन खड़ा होगा।

उन्होंने यह भी मांग की कि पूरे मामले की गहराई से जांच कर यह पता लगाया जाए कि कहीं आरोपियों के तार बहराइच के चर्चित झांगुर बाबा नेटवर्क से तो नहीं जुड़े हुए हैं।
हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
भाजपा जिलाध्यक्ष भी पहुंचे, एसपी से की मुलाकात
मामले की गंभीरता को देखते हुए भाजपा जिलाध्यक्ष अरविंद गुप्ता भी प्रदर्शन स्थल पहुंचे।
उन्होंने भाजपा नेताओं और हिन्दू संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ पुलिस अधीक्षक डॉ. ख्याति गर्ग से मुलाकात कर मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की।
अरविंद गुप्ता के मुताबिक पुलिस अधीक्षक ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है और कहा है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जांच एएसपी को सौंपी गई
बढ़ते विवाद और आरोपों के बीच पुलिस अधीक्षक डॉ. ख्याति गर्ग ने मामले की जांच अपर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी अमित कुमार राय को सौंप दी है।
पुलिस का कहना है कि जांच पूरी निष्पक्षता के साथ कराई जाएगी और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सबसे बड़ा सवाल
लेकिन इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम है।
अगर पुलिस की कार्रवाई पूरी तरह निष्पक्ष थी तो परिजनों को विरोध के लिए सड़क पर उतरने की जरूरत क्यों पड़ी?
अगर बयान प्रक्रिया नियमों के तहत हुई तो फिर परिवार सवाल क्यों उठा रहा है?
और अगर पुलिस पर लगे आरोप गलत हैं तो फिर जांच किसी दूसरे अधिकारी को क्यों सौंपी गई?
फिलहाल इन सवालों के जवाब जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएंगे, लेकिन इतना जरूर है कि इस पूरे प्रकरण ने लखीमपुर खीरी पुलिस की कार्यशैली को बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है।

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