उत्तरप्रदेशलखीमपुर खीरी

सरकारी स्कूल या कॉन्वेंट? लखीमपुर खीरी के इस मॉडल ने बदल दी शिक्षा की तस्वीर

बाल वाटिका और अन्नपूर्णा कुंज बने बच्चों की पहली पसंद, खेल-खेल में पढ़ाई और होटल जैसी रसोई ने बढ़ाई उपस्थिति

कभी बदहाल और उपेक्षा का शिकार रहे आंगनबाड़ी केंद्र आज उत्तर प्रदेश के लिए मिसाल बन चुके हैं। जहां कभी बच्चे आने से कतराते थे, आज वहीं शतरंज, कैरम, बैडमिंटन, मॉड्यूलर किचन और रंग-बिरंगी दीवारें बच्चों को आकर्षित कर रही हैं। सवाल यह है कि क्या लखीमपुर खीरी का धौरहरा मॉडल अब पूरे उत्तर प्रदेश में शिक्षा और पोषण की नई पहचान बनेगा?

लखीमपुर खीरी। कभी बदहाली और उपेक्षा का शिकार रहे धौरहरा ब्लॉक के आंगनबाड़ी केंद्र और प्राथमिक विद्यालय आज पूरे उत्तर प्रदेश के लिए मिसाल बनकर उभरे हैं। हरदी, अमेठी, महादेव, कटैला पुरवा, देवीपुरवा और बबुरी समेत कई गांवों में तैयार की गई बाल वाटिकाएं और अन्नपूर्णा कुंज बच्चों के लिए शिक्षा, खेल और पोषण का ऐसा केंद्र बन गए हैं, जिसने सरकारी विद्यालयों की पारंपरिक छवि ही बदल दी है।
धौरहरा ब्लॉक के हरदी और बबुरी गांव में स्थित आंगनबाड़ी केंद्रों को पूरी तरह बाल वाटिका के रूप में विकसित किया गया है। यहां बच्चों के लिए शतरंज, कैरम बोर्ड, बैडमिंटन, रंग-बिरंगी गेंदें, पहेली खेल, ब्लॉक्स, चित्र पुस्तिकाएं, शैक्षणिक खिलौने, झूले और स्लाइड जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसका परिणाम यह हुआ कि पहले जहां बच्चों की उपस्थिति कम रहती थी, वहीं अब बच्चे उत्साह के साथ केंद्रों तक पहुंच रहे हैं।
अमेठी गांव की बाल वाटिका की दीवारें बच्चों के लिए किसी किताब से कम नहीं हैं। यहां दीवारों पर शरीर के अंगों के नाम, फलों और सब्जियों की पहचान, वर्णमाला, संख्याएं, प्रेरक संदेश और जनपद का इतिहास आकर्षक चित्रों के माध्यम से उकेरा गया है। बच्चे खेल-खेल में नई चीजें सीख रहे हैं। शिक्षकों का मानना है कि दृश्य आधारित शिक्षा बच्चों के मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
महादेव गांव के प्राथमिक विद्यालय में तैयार किया गया अन्नपूर्णा कुंज आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां मध्याह्न भोजन पूरी स्वच्छता और व्यवस्थित तरीके से तैयार किया जाता है। आधुनिक रसोई व्यवस्था और बच्चों के बैठकर भोजन करने के लिए विशेष स्थान बनाए गए हैं। भोजन कक्ष की दीवारों पर शैक्षणिक वॉल पेंटिंग बनाई गई हैं, जिससे भोजन के दौरान भी बच्चों का सीखने का क्रम जारी रहता है।
ग्राउंड जीरो रिपोर्ट डिजिटल की टीम जब देवीपुरवा गांव पहुंची तो वहां का नजारा किसी निजी कॉन्वेंट स्कूल से कम नहीं दिखाई दिया। विद्यालय परिसर में मॉड्यूलर किचन, आधुनिक लैब, खेल उपकरण और आकर्षक शैक्षणिक संसाधन मौजूद थे। कटैला पुरवा और बबुरी गांव में भी इसी प्रकार की सुविधाओं ने सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदल दी है।
कक्षा चार के छात्र लवकुश बताते हैं कि पहले विद्यालय की स्थिति अच्छी नहीं थी, लेकिन अब यहां पढ़ाई के साथ-साथ खेलने और सीखने का बेहतर माहौल है। वहीं कक्षा पांच के छात्र अंशुल का कहना है कि आधुनिक लैब और खेल गतिविधियों की वजह से अब उनकी स्कूल में रुचि बढ़ गई है और वे नियमित रूप से विद्यालय आते हैं।


खंड विकास अधिकारी संदीप कुमार तिवारी बताते हैं कि बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास को ध्यान में रखते हुए बाल वाटिका और अन्नपूर्णा कुंज मॉडल विकसित किए गए हैं। बच्चों को केवल किताबों तक सीमित न रखकर खेल-खेल में शिक्षा देने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए खेल सामग्री, शैक्षणिक खिलौने और वॉल पेंटिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
मुख्य विकास अधिकारी अभिषेक कुमार का कहना है कि धौरहरा ब्लॉक में विकसित यह मॉडल उत्तर प्रदेश में मील का पत्थर साबित हो रहा है। विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रभावी समन्वय और अधिकारियों की कार्यकुशलता के कारण यह बदलाव संभव हो पाया है। अब इस मॉडल को जिले के अन्य ब्लॉकों में भी लागू करने की योजना बनाई जा रही है।
धौरहरा की यह पहल न केवल शिक्षा और पोषण के क्षेत्र में नई सोच का प्रतीक है, बल्कि यह भी साबित करती है कि यदि इच्छाशक्ति और बेहतर प्रबंधन हो तो सरकारी संस्थान भी निजी स्कूलों को टक्कर दे सकते हैं।

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